संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर गरजे अमित शाह, कांग्रेस में उभरा असंतोष; ममता ने छेड़ा ‘भाषा आंदोलन’

संसद के मानसून सत्र में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर जोरदार बहस हुई। लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह और राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और विपक्ष पर तीखे हमले किए। वहीं कांग्रेस के भीतर असहमति की लहर दिखाई दी, जहां मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी की रणनीति से असहमत नजर आए। इधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ‘भाषा आंदोलन’ का ऐलान कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर देश की सुरक्षा नीति का साहसी उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि “पाकिस्तान का वजूद कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती है” और नेहरू के निर्णयों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। शाह ने कहा, “जब देश सबूतों के साथ पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए घेरता है, तब कांग्रेस उसे क्लीन चिट देने में लगी रहती है।”

राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ किसी भी सीमा तक जाएगा। उन्होंने कहा, “भारत माता की मांग में शौर्य का सिंदूर है, उस पर राजनीति की धूल न डालें।” इस दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच भी तीखी बहस हुई।

इस बीच कांग्रेस के भीतर असंतोष उभरकर सामने आया। सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अप्रत्यक्ष नाराजगी जाहिर की। उन्होंने शशि थरूर के साथ संसद में बोलने से रोके जाने पर देशभक्ति गीत की पंक्तियों के साथ पोस्ट साझा कर संदेश दिया—“भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं।”

उधर, नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी की मुश्किलें कम नहीं हुईं। राउज एवेन्यू कोर्ट में ईडी की चार्जशीट पर फैसला 7-8 अगस्त तक के लिए टाल दिया गया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोलपुर से ‘भाषा आंदोलन’ की शुरुआत करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा बंगालियों को डिटेंशन कैंप में भेजना चाहती है। उन्होंने कहा, “मैं जान दे दूंगी, लेकिन किसी को बंगालियों से उनकी भाषा नहीं छीनने दूंगी।” ममता ने SIR को एनआरसी का पिछला दरवाजा करार दिया और केंद्र को सीधी चुनौती दी।

संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस और कांग्रेस में उभरे असंतोष के बीच, देश की राजनीति नई दिशा की ओर बढ़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में ये मुद्दे विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच टकराव का मुख्य केंद्र बने रह सकते हैं।

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