UK दौरे पर पीएम मोदी का फोकस, FTA और भगोड़ों के प्रत्यर्पण पर अहम वार्ता

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों चार दिवसीय विदेश दौरे पर हैं, जिसमें वे यूनाइटेड किंगडम और मालदीव का दौरा कर रहे हैं। इस दौरे की शुरुआत 23 जुलाई को हुई, जो 26 जुलाई तक चलेगा। प्रधानमंत्री 24 जुलाई तक ब्रिटेन में रहेंगे, जिसके बाद 25 और 26 जुलाई को मालदीव की यात्रा करेंगे। यह दौरा कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

UK-India FTA पर साइन की संभावना

ब्रिटेन दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर मानी जा रही है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके तहत व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले एक साल से FTA पर बातचीत जारी थी, जिसे अब अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह समझौता भारतीय उद्यमियों और उद्योग जगत के लिए निर्यात के नए अवसर खोलेगा, जबकि ब्रिटेन को भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार तक पहुंच मिलेगी।

खालिस्तान समर्थकों और भगोड़ों का मुद्दा भी एजेंडे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान खालिस्तान समर्थकों और भारत में वांछित भगोड़ों के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडे में शामिल है। भारत सरकार लंबे समय से ब्रिटेन से अनुरोध कर रही है कि वह भारत में दंगे भड़काने और आतंक से जुड़े मामलों में वांछित व्यक्तियों को प्रत्यर्पित करे।

ब्रिटेन में बसे कुछ खालिस्तान समर्थक समूहों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों पर भी भारतीय पक्ष चिंता जता चुका है। इस बार प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस पर कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत ब्रिटेन के साथ प्रत्यर्पण संधि को मजबूत बनाने की दिशा में भी चर्चा कर सकता है।

मालदीव दौरे में स्वतंत्रता दिवस समारोह में होंगे शामिल

ब्रिटेन के बाद प्रधानमंत्री मोदी मालदीव जाएंगे, जहां वे 26 जुलाई को मालदीव के 60वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत द्विपक्षीय रिश्तों को और सुदृढ़ करने का संकेत देती है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा जहां भारत की वैश्विक कूटनीति को नई दिशा दे सकता है, वहीं भारत-यूके संबंधों में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को भी एक नई मजबूती देने की ओर बढ़ रहा है। FTA पर साइन और भगोड़ों के प्रत्यर्पण जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति होने की स्थिति में यह दौरा ऐतिहासिक बन सकता है।

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