अमेरिका-पाकिस्तान में आतंकवाद पर सहयोग की सहमति, भारत को परमाणु हमले की धमकी से बढ़ा तनाव

 

पाकिस्तान और अमेरिका ने बालोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), इस्लामिक स्टेट-खुरासान (ISIS-K) और तालिबान जैसे आतंकवादी संगठनों से निपटने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। यह सहमति 12 अगस्त को इस्लामाबाद में हुए काउंटरटेररिज्म डायलॉग में बनी। इस बीच, पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भारत को न्यूक्लियर धमकी और सिंधु जल समझौते पर भारत के फैसले ने तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी F-16 विमानों के नुकसान पर सवालों से इनकार किया।

इस्लामाबाद में हुई बैठक में पाकिस्तान के विशेष सचिव नबील मुनीर और अमेरिकी विदेश विभाग के काउंटरटेररिज्म समन्वयक ग्रेगरी डी. लोगरफो ने हिस्सा लिया। संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ “सभी रूपों में” लड़ने की प्रतिबद्धता जताई। अमेरिका ने BLA को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया, जिसे पाकिस्तान ने भारत द्वारा समर्थित बताया। अमेरिका ने पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी प्रयासों की सराहना की और हाल के हमलों में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिका में कहा, “अगर पाकिस्तान का अस्तित्व खतरे में आया, तो हम आधा विश्व अपने साथ ले जाएंगे।” इस बयान की पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन ने निंदा की और मुनीर पर अमेरिका में प्रतिबंध की मांग की।

सिंधु जल समझौते पर भारत के हालिया फैसले से पाकिस्तान में हलचल मची है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को धमकी दी कि “पाकिस्तान के हिस्से का एक बूंद पानी नहीं लेने दिया जाएगा, वरना सबक सिखाया जाएगा।” इससे पहले बिलावल भुट्टो ने भी भारत पर निशाना साधा था। भारत ने इस समझौते पर पुनर्विचार की बात कही है, जिसे पाकिस्तान ने उकसावे वाला बताया।
अमेरिका-पाकिस्तान सहयोग में हाल के महीनों में सुधार हुआ है। मुनीर की ट्रंप से मुलाकात और F-16 प्रोग्राम के लिए 397 मिलियन डॉलर की अमेरिकी सहायता इसकी मिसाल है।

मुनीर की धमकियों और सिंधु जल विवाद ने भारत-पाक तनाव को बढ़ाया है। ट्रंप-मुनीर मुलाकात और अलास्का में पुतिन से होने वाली बैठक क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। दुनिया की नजरें अब इन कूटनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हैं।

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