पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद के पास जेहलम नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद स्थानीय प्रशासन ने भारत पर आरोप लगाए हैं। दूसरी ओर, भारत ने 1960 के सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के तहत गठित एक “अवैध” पंचाट द्वारा जारी “पूरक निर्णय” को खारिज कर दिया है। साथ ही, पाकिस्तान के कई उत्तरी जिलों में ग्लेशियल झील फटने और भारी बारिश से बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

जेहलम नदी में बाढ़ का खतरा, पानी आपातकाल लागू

मुजफ्फराबाद के पास जेहलम नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया गया। हटीयन बाला क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन ने जल आपातकाल घोषित कर दिया है। यह इलाका मुजफ्फराबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। प्रशासन ने मस्जिदों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को सतर्क किया, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों में दहशत फैल गई है।

पाकिस्तान में GLOF और फ्लैश फ्लड की चेतावनी

पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग (PMD) ने 26 जून से 1 जुलाई तक भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी करते हुए खैबर पख्तूनख्वा के पांच जिलों—अपर चितराल, लोअर चितराल, अपर कोहिस्तान, स्वात और अपर दीर—में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और अचानक बाढ़ की गंभीर चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जानलेवा बाढ़ की आशंका जताई गई है।

भारत का कड़ा रुख, पंचाट को बताया अवैध

भारत ने हाल ही में एक “अवैध” कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन द्वारा जारी निर्णय को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रैटल हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर आपत्तियां उठाई गई थीं। भारत के अनुसार, यह पंचाट 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन करते हुए गलत तरीके से गठित किया गया है और इसके किसी भी निर्णय को कानूनी वैधता प्राप्त नहीं है।

भारत सरकार के बयान में कहा गया, “भारत ने कभी भी इस कथित पंचाट को मान्यता नहीं दी है और इसके सभी निर्णय भारत के लिए शून्य और अवैध हैं।”

जहां एक ओर पाकिस्तान में जलवायु आपात स्थितियां और आंतरिक बाढ़ प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर गहराता दिख रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के जल संबंधों और कूटनीतिक बातचीत पर इस घटनाक्रम का सीधा असर पड़ सकता है।