खड़गे की CWC की टीम के पीछे की रणनीति हुई फ़ैल

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कांग्रेस की 39 सदस्यई CWC की टीम से पार्टी में ही बवाल शुरू हो गया. कांग्रेस आलकमान जहां पार्टी में बढ़ते विद्रोह को शांत करने की कोशिश में लगा था. सचिन पायलट को शामिल करके मल्लिकारजुन खड़गे ने राजस्थान का गतिरोध शांत करने की कोशिश की है. उन्होंने सचिन पायलट को CWC में शामिल कर राजस्थान में ऑल इज वेल का संदेश दे दिया है.

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चूंकि राजस्थान में अगले कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं. उसके बाद सचिन का AICC महासचिव बनना तय है. पार्टी लगातार विधानसभा चुनाव जीतकर राजस्थान में वापसा पर जोर दे रही है. लेकिन सवाल है कि जहां पायलट को नई टीम में जगह देकर राजस्थान की सिचुएशन पर ऑल इज वेल का संकेद दिया गया है.

G-23 गुट के नेताओं को भी मिली तरजीह

नई सीडब्ल्यूसी टीम के जरिए कांग्रेस ने जी-23 फैक्टर को भी सफलतापूर्वक दफन कर दिया है. खड़गे ने चतुराई से शशि थरूर, आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक, वीरप्पा मोइली, मनीष तिवारी और अन्य उन नेताओं को भी जगह दी है, जिन्होंने तत्कालीन AICC की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र भेजा था.

शशी थरूर जिन्होंने एआईसीसी अध्यक्ष पद के लिए खड़गे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. अब सीडब्ल्यूसी की नई टीम में थरूर को शामिल करके खड़गे ने एक स्वस्थ पार्टी संस्कृति का संकेत दिया है. ऐसा करके खड़गे ने एक संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी में असहमति को दबाया नहीं जाता है.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तो सरकार पर धर्म के आधार पर भेदभाव करने के आरोप लगा दिए. इतना ही नहीं कुछ देर बाद तो उन्होंने अशोक गहलोत पर भी घोटालों को लेकर हमला बोल दिया लाल डायरी का जिक्र करते हुए राजस्थान की कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा. केरल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला सीडब्ल्यूसी की नई सूची से नाराज हो गए.

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते विभाकर शास्त्री भी शामिल हैं. सीडब्लूसी का लिस्ट जारी होने के बाद विभाकर शास्त्री ने एक ट्वीट किया. अपने ट्वीट में उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की थी. हालांकि बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट भी कर दिया था. इसी के साथ कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और हिमाचल के मुख्यमंत्रियों को भी इस टीम का हिस्सा नहीं बनाया गया है.

लेकिन पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की भरमार है. टीम में जगह पाने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री, दिग्विजय सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी और हरीश रावत शामिल हैं. वहीं, सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा के बावजूद केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एके एंटनी को पार्टी की सबसे ताकतवर संस्था में शामिल किया गया है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम, जयराम रमेश, सलमान खुर्शीद आदि भी इसका हिस्सा हैं. नए सदस्यों के तौर पर दीपा दासमुंशी, शाहिद नासिर हुसैन को जगह मिली है. स्थायी और विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में गौरव गोगोई, केसी वेणुगोपाल, अलका लांबा, सुप्रिया श्रीनेत, कन्हैया कुमार, मनिकम टैगोर के रूप में नए चेहरे को मौका दिया गया है.

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सीडब्ल्यूसी में 50-50 फॉर्मूला फेल

कांग्रेस के उदयपुर चिंतन शिविर में युवाओं को तरजीह देने का फैसला हुआ था. मल्लिकार्जुन खड़गे ने उदयपुर शिविर के 50-50 फॉर्मूले को लागू करने की बात कही थी. सीडब्ल्यूसी से इसकी शुरुआत होगी, ऐसी उम्मीद थी लेकिन हुआ उसका उल्टा. कांग्रेस की 84 सदस्यों वाली सीडब्ल्यूसी में केवल तीन नेता ही ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है. जिसमें सचिन पायलट, गौरव गोगोई और कमलेश्वर पटेल शामिल है.

सीडब्ल्यूसी की स्थायी आमंत्रित सदस्यों में कन्हैया कुमार, दीपेंद्र सिंह हुड्डा 45 साल, मणिकम टैगोर, देवेंद्र यादव और मिनाक्षी नटराजन को जगह दी गई है. 50 साल के आसपास उम्र वाले नेताओं को भी शामिल कर लें तो ये तादाद करीब दो दर्जन तक पहुंचती है. कांग्रेस की नई सीडब्ल्यूसी में उदयपुर चिंतन शिविर का 50-50 फॉर्मूला फेल रहा है.

सीडब्ल्यूसी में बुजुर्ग नेताओं की भरमार है. 90 साल के डॉक्टर मनमोहन सिंह सबसे उम्रदराज सीडब्ल्यूसी सदस्य हैं. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन के बाद उम्र के लिहाज से एके एंटनी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, अंबिका सोनी, मीरा कुमार, पी चिदंबरम, सोनिया गांधी, दिग्विजय सिंह का नंबर आता है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री 75 साल के हरीश रावत और 74 साल के ताम्रध्वज साहू, 72 साल के तारिक अनवर को भी सीडब्ल्यूसी में जगह दी गई है.

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