ईरान-इज़रायल जंग, क्या तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ रही है दुनिया?

 

ईरान और इजरायल के बीच शुरू हुई जंग अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है। धीरे-धीरे इस टकराव में यमन, इराक, सीरिया और लेबनान जैसे देश भी झुलसने लगे हैं। अब जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर ईरान को चेतावनी दी है, तो यह साफ हो गया है कि मामला अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने कोई दुस्साहस किया, तो उसका अंजाम ऐसा होगा, जैसा उसने न कभी देखा है और न सोचा है।

ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। मिसाइलें चल रही हैं, ड्रोन हमले हो रहे हैं और लगातार जवाबी कार्रवाई जारी है। रूस और चीन इस संघर्ष पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। रूस नहीं चाहता कि अमेरिका ईरान पर हमला करे, वहीं चीन तनाव का विरोध कर रहा है। दुनिया अब दो हिस्सों में बंटती दिखाई दे रही है—अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान-रूस-चीन।

ट्रंप की चेतावनी और परमाणु डील की पृष्ठभूमि

ईरान ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस को जताया है कि वे ईरान को रोकने की कोशिश न करें। ईरानी राष्ट्रपति ने पुतिन से बात की है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान से बिना नए समझौते के हालात और बिगड़ेंगे। गौरतलब है कि 2018 में ट्रंप ने खुद अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर डील को तोड़ा था, जिसके बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर तेजी से काम शुरू कर दिया।

अब अमेरिका पर युद्ध में शामिल होने का दबाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप ने चुनावी प्रचार में वादा किया था कि वह लंबा युद्ध नहीं शुरू करेंगे, लेकिन अब तेहरान में शासन परिवर्तन की मांग भी तेज हो रही है।

चीन की खामोश भूमिका और युद्ध का बढ़ता दायरा

ईरान इजरायल पर लगातार मिसाइल हमले कर रहा है, वहीं इजरायल उन्हें नाकाम कर रहा है। ईरान अब खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बना सकता है। खाड़ी में 2019 और 2022 में हुए हमलों के बाद अब खतरा और बढ़ गया है।

चीन इस पूरे संघर्ष में खामोश लेकिन अहम भूमिका निभा रहा है। उसने ईरान को हथियार और मिसाइल फ्यूल सप्लाई किया है। यह वही चीन है जो भारत के खिलाफ पाकिस्तान का समर्थन करता है।

ईरान-इजरायल युद्ध लंबा खिंचने के आसार दिख रहे हैं। अमेरिका ने अपने नागरिकों को अलर्ट कर दिया है। यह जंग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकती है क्योंकि ईरान तेल और गैस का बड़ा उत्पादक है। क्या यह टकराव तीसरे विश्व युद्ध का संकेत है? जवाब आने वाले समय में मिलेगा।

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