BRICS Summit 2025 से गायब शी जिनपिंग, क्या चीन में सत्ता संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं?

 

ब्राज़ील में 6 और 7 जुलाई को आयोजित BRICS Summit 2025 में चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping की अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। यह पहली बार है जब शी जिनपिंग, जो 12 वर्षों से चीन के सर्वोच्च नेता हैं, ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंच से दूर रहे। आधिकारिक तौर पर इसकी वजह ‘कार्यक्रम संबंधी उलझनें’ बताई गई हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे सत्ता के भीतर संभावित बदलाव का संकेत मान रहे हैं।

Xi Jinping की गैरमौजूदगी की खबर आते ही भारत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे चीन में उनकी कमजोर होती राजनीतिक पकड़ के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शी जिनपिंग हाल के दिनों में सार्वजनिक कार्यक्रमों से भी दूर रहे हैं, जिससे अफवाहों को और बल मिला है। इससे पहले भी, जैसे 2012 और कोविड-19 महामारी के समय, शी की लंबी अनुपस्थिति को लेकर ऐसी चर्चाएं हो चुकी हैं।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिक्स सम्मेलन से पहले शी ने ब्राज़ीलियाई राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा से मुलाकात की थी, और शायद इसी वजह से उन्होंने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। वहीं दूसरी ओर, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। पुतिन के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गिरफ्तारी वारंट की वजह से उनकी अनुपस्थिति को तात्कालिक कठिनाइयों से जोड़ा गया।

चीन की सत्ता संरचना और Xi Jinping की स्थिति पर नजर डालें तो फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है जो यह दर्शाए कि उनकी पकड़ कमजोर हो रही है। चीन का राजनीतिक तंत्र ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह काम करता है, जहां सीमित जानकारी ही सार्वजनिक होती है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर सत्ता में अस्थिरता होती तो उसके कुछ ठोस संकेत दिखाई देते—जैसे प्रांतीय नेताओं की बढ़ती स्वतंत्रता, सैन्य बयानों में असहमति या केंद्रीय नेतृत्व की असंगत टिप्पणियां। फिलहाल, ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला है।

गौरतलब है कि 2022 में Xi Jinping को तीसरी बार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का महासचिव चुना गया था, जिससे उनका शासन 2027 तक के लिए सुरक्षित हो गया। इसके बावजूद, हाल ही में चीन में दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया गया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि देश के भीतर भ्रष्टाचार और शक्ति संतुलन को लेकर कुछ अंदरूनी चुनौतियां जरूर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक चीनी नेतृत्व के भीतर कोई ठोस और स्पष्ट विरोध नहीं उभरता, तब तक Xi Jinping की स्थिति पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी। फिर भी, उनकी अनुपस्थिति ने वैश्विक हलकों में चीन की राजनीतिक स्थिरता को लेकर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है।

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