अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती घोटाले में SC से नहीं मिली राहत

abhishek banerjee mamta banerjee

ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी से शिक्षक घोटाला मामले में सीबीआई और ईडी पूछताछ करना चाहती है. इसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार पहले कलकत्ता हाई कोर्ट गई थी, लेकिन वहां अंतरिम राहत नहीं मिली.

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हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ से राहत देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से ही इनकार कर दिया. यानी कि अब मामले में अभिषेक से पूछताछ भी होगी और कभी भी उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है.

हाई कोर्ट ने दी थी पूछताछ की अनुमति

जुलाई महीने में ईडी ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया था कि वह जांच के संबंध में 31 जुलाई तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी समेत कोई बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करेगी. शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही अभिषेक बनर्जी को झटका दिया था, जब वो ईडी की जांच को जारी रखने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.

उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच न रोककर सही किया है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने ईडी और सीबीआई को भर्ती घोटाले में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करने के लिए अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में सुनवाई के दौरान कहा था कि वह ऐसे किसी मामले की जांच को नहीं रोकेगा, जिसके बारे में हाई कोर्ट ने कहा है कि इसके व्यापक प्रभाव होंगे.

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सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के बाद कहा था कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने बनर्जी की अर्जी पर विस्तार से विचार किया है और सही निष्कर्ष निकाला है कि ईडी जांच को रोका नहीं जा सकता. इससे पहले भी ममता के भतीजे मामले में राहत के लिए कोर्ट से गुहार लगा चुके हैं. लेकिन हर बार उन्हें मुंह की ही खानी पड़ी है. इतना ही नहीं अभिषेक बनर्जी और घोटाले के आरोपी कुंतल घोष पर हाई कोर्ट 25-25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा चुका है. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई है.

क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला ?

बंगाल में हुआ यह घोटाला 2014 का है, तब पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन यानी SSC ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती निकाली थी. प्रक्रिया 2016 में शुरू हुई थी. उस वक्त पार्थ चटर्जी शिक्षा मंत्री थे. इस मामले में गड़बड़ी की कई शिकायतें कोलकाता हाईकोर्ट में दाखिल हुई थीं. याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जिन कैंडिडेट के नंबर कम थे उन्हें मेरिट लिस्ट में टॉप पर रखा गया. कुछ कैंडिडेट का मेरिट लिस्ट में नाम न होने पर भी उन्हें नौकरी दे दी गई.

ऐसे लोगों को भी नौकरी दी गई, जिन्होंने TET परीक्षा भी पास नहीं की थी. जिसके बाद इस मामले में गड़बड़ी की कई शिकायतें कोलकाता हाईकोर्ट में दाखिल हुई थीं. फिर मई 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने CBI को आदेश दिया था कि पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन और पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की तरफ से 2014 से 2021 के बीच नॉन-टीचिंग स्टाफ और टीचिंग स्टाफ में जो भी अपॉइंटमेंट किए गए हैं, उनकी जांच की जाए। ऐसी खबरें थीं कि उम्मीदवारों ने सिलेक्शन टेस्ट में फेल होने के बाद सिलेक्शन के लिए 5 से 15 लाख रुपए तक की रिश्वत दी थी.

 

 

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