अविश्वास प्रस्ताव लाकर बुरी फंस गयी कांग्रेस

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विपक्ष लगातार संसद में मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग के साथ इस मसले पर सदन के अंदर पीएम मोदी के बयान की मांग कर रहा है. पीएम मोदी ने सदन के बाहर इस मामले में बायान दिया था.

उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी आश्वासन दिया था. केंद्र सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया कि वो इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है.

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विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले कर आई है. कांग्रेस के गौरव गोगोई ने लोकसभा में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया और स्पीकर की ओर से इसे स्वीकार कर लिया गया.

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि “पहले भी सबक सिखाया है और इस बार भी सबक सिखाएंगे. पीएम मोदी पर जनता का विश्वास है.”

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि “विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने दीजिए. हम तो चाहते हैं कि मणिपुर पर चर्चा हो. जब हम सहमत हुए, तो उन्होंने (विपक्ष) नियमों का मुद्दा उठाया. मुझे लगता है कि ये सभी बहाने हैं.”

अविश्वास प्रस्ताव क्या है?

अविश्वास प्रस्ताव लाने की जरूरत तब पड़ती है जब विपक्ष को लगता है कि वो सत्ता पक्ष को हरा सकता है. केंद्र में बैठी सरका को गिराने के लिए उसके पास पूर्ण बहुमत है. इस सदन में विपक्ष के पास संख्या है और न बहुमत.

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अविश्वास प्रस्ताव में कितना दम ?

नंबर गेम में केंद्र सरकार ही आगे हैं. लोकसभा में बहुमत का आंकड़ा 269 है. अकेले भाजपा के पास 301 सांसद हैं. 333 सांसदों का समर्थन उसे एनडीए के पास है. ‘इंडिया’ गठबंधन के पास कुल 142 सांसद ही हैं.

पीएम मोदी ने 2018 में की थी भविष्यवाणी!

इसी अब विपक्ष की ओर से मोशन पेश किए जाने के बीच पीएम मोदी की भविष्यवाणी का 2018 का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में पीएम मोदी ने विपक्ष से 2023 में अविश्वास प्रस्ताव के लिए तैयार रहने की बात कही थी.

2018 में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विश्वास मत की इजाजत दी थी. हालांकि इस अविश्वास प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के दौरान एनडीए को 325 वोट मिले.

 

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