मोदी के जाल में फंसा विपक्ष, 7 पार्टियाँ NDA में शामिल

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बीजेपी की डबल इंजन सरकार अब हैट्रिक लगाने की तैयारी कर रही है. सरकार, संगठन और गठबंधन तीनों को ही इस तरीके से मजबूत किया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली विपक्षी एकता की धज्जियांउड़ती दिखाई दे रही है.

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बीजेपी ने अपने संगठन को नई धार देने की कवायद की, तो उसके बाद गठबंधन को लेकर एनडीए के कुनबे को विस्तार दिया और अब सरकार के स्तर पर एक्शन शुरू हो गया है. 2024 के लिए एनडीए सांसदों के 10 ग्रुप बनाए गए हैं और इन ग्रुप के प्रभारी का जिम्मा केंद्रीय मंत्रियों को सौंपा गया है. संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद हर रोज एनडीए के सांसदों के साथ बैठक करेंगे और सीधे फीडबैक लेने के साथ-साथ जीत का मंत्र भी देंगे.

10 ग्रुप में बांटा गया सांसदों को

एनडीए में इस समय लोकसभा में 338 सदस्य हैं. एनडीए के सांसदों को 10 ग्रुप में बांटा गया है. ये बैठकें 25 जुलाई से शुरू होने वाली हैं. प्रत्येक ग्रुप में विशिष्ट क्षेत्र वाले 35 से 40 सांसद शामिल होंगे. मिशन-2024 के लिए बीजेपी अपने संगठन से गठबंधन तक को दुरुस्त करने के बाद जमीनी हकीकत को जानने और समझने के लिए एनडीए सांसदों की टीम गठित की है. बीजेपी ने लोकसभा सीटों के लिहाज से देश को तीन जोन-ईस्ट, नॉर्थ और साउथ में बांट रखा है, तो मोदी सरकार ने देश को दस क्लस्टर में बांटा है और 10 ही ग्रुप एनडीए के सांसदों के बनाए गए हैं. हर एक ग्रुप में 35 से 40 सांसद को रखा गया है. इन सांसदों से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फीडबैक लेंगे.

कौन-कैन शामिल?

जानकारी के मुताबिक पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, अनुराग ठाकुर, नित्यानंद राय, प्रल्हाद जोशी, अर्जुन राम मेघवाल, सर्बानंद सोनोवाल सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों को सांसदों के समूह का प्रभारी बनाया जा सकता है.

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पीएम मोदी 25 जुलाई से तीन अगस्त तक हर दिन सांसदों के दो जोन के साथ बैठक करेंगे. पहले दिन उत्तर प्रदेश और नॉर्थ ईस्ट की बैठक करेंगे. यूपी की बैठक में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ग्रुप के प्रभारी के तौर पर शामिल हो सकते हैं.

पीएम मोदी एक तरफ देश की सियासी हकीकत की थाह लेने के साथ-साथ अपने मौजूदा सांसदों के इलाके के मिजाज की स्थिति का भी आकलन लेंगे. इतना ही नहीं अपने विकास योजनाओं की स्थिति को भी समझ सकेंगे. दूसरी तरफ बीजेपी ग्रुप में एनडीए सांसदों को भी शामिल किया है. इस तरह बीजेपी और सहयोगी दलों के सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संवाद कर बेहतर समन्वय और तालमेल बैठाएंगे.

कई दल हुए NDA में शामिल

बीजेपी ने छोटे-छोटे दलों को जोड़कर अपने गठबंधन में सिर्फ दल ही नहीं बढ़ाए बल्कि सियासी समीकरण को भी मजबूत करने की रणनीति अपनाई है. बीजेपी ने जिन छोटे दलों के साथ हाथ मिलाया है, उनका अपने समाज के बीच सियासी आधार है. ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को लाने के पीछे समीकरण का खेल है. केंद्रीय मंत्रियों को चुनावी राज्यों का प्रभारी बनाया गया है तो कई राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष भी बदल दिए गए हैं. पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं.

बैंगलुरु में 26 विपक्षी दलों के महाजुटान में सभी ने एक साथ चुनाव लड़ने का संकल्प लिया था, लेकिन बैठक खत्म होते ही विपक्ष में फिर से घमासान शुरु हो गया. क्योंकि बैंगलुरु की बैठक में कांग्रेस ने मोदी सरने मामले में राहुल गांधी को हाईकोर्ट से लगे झटके के बाद साफ कर दिया था कि वो पीए पद की दावेदारी नहीं चहाती है. ऐसे में पीएम उम्मीदवार की रेस में दौड़ रहे विपक्ष के बाकि नेताओं की राह आसान हो गई है. सबसे पहले ममता बनर्जी ने कदम आगे बढाया और टीएमसी ने पीएम उम्मीदवार के रुप में ममता का नाम आगे कर दिया.

लेकिन 2024 में विपक्ष का एजेंडा क्या होगा वो दो बैठकों के बाद भी तैय नहीं हो पाया है और इसलिए कभी अडानी मुद्दे पर तो कभी मणिपुर के मुद्दे पर हांगामा कर मॉनसून सत्र में सदन की कार्रवाई को चलने नहीं दिया जा रहा है.

 

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