मणिपुर की घटना के बाद गुस्से और क्रोध में भरा है पीऐम मोदी का दिल

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हमारे देश में महिलाओं की पूजा होती है और उन्हें लक्ष्मी तथा सरस्वती का रूप मानते हैं. भगवन के जैसे उनका आशीर्वाद लेते हैं. लेकिन मणिपुर में हुई घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मणिपुर के सीएम पूरी तरह से एक्शन में नजर आ रहे हैं. और सीएम बीरेन ने उन लोगों को फांसी देने की भी मांग कर दी है.

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आज से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो गया है. इसी घटना का लेकर सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बात करते हुए लोगो को चेताया है कि ऐसी अमानवीय घटना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उन्होंने ने मणिपुर की घटना को लेकर कठोर कार्रवाई का भरोसा पूरे देश को दिलाया है.

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

मणिपुर की जो घटना सामने आई है, वो किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मसार करने वाली घटना है. पाप करने वाले, गुनाह करने वाले कितने हैं, कौन हैं, वो अपनी जगह पर हैं, लेकिन बेइज्जती पूरे देश की हो रही है. इससे 140 करोड़ देशवासियों को शर्मसार होना पड़ रहा है. सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करता हूँ कि वो अपने राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करें, खासकर माताओं-बहनों की रक्षा के लिए कठोर से कठोर कदम उठाएं. घटना चाहे राजस्थान की हो, घटना चाहे छत्तीसगढ़ की हो, चाहे मणिपुर की हो, देश के किसी भी कोने में, किसी भी सरकार में राजनीतिक वाद-विवाद से ऊपर उठकर कानून व्यवस्था का महात्मय, नारी का सम्मान जरूरी है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश को आश्वस्त किया है कि इस तरह की घटनाओं पर कोई भी कोताही नहीं बरती जाएगी. देशवासियों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा. कानून अपनी पूरी शक्ति से एक के बाद एक कदम उठाएगा. मणिपुर की इन बेटियों के साथ जो हुआ है, इसको कभी माफ नहीं किया जा सकता.

क्या है मणिपुर की घटना?

इस पूरी घटना की शुरूआत एक वीडियो से हुई है जो मणिपुर का बताया जा रहा है. ये वीडियो 4 मई 2023 की है, इसमें दो महिलाओं का नग्न परेड करवा रही भीड़ उन्हें खींचकर गैंगरेप के लिए खेतों की तरफ ले जाती दिखाई पड़ती है. इस घटना को लेकर 18 मई को दर्ज हुई एफआईआर के मुताबिक तीन महिलाओं के साथ भीड़ ने दरिंदगी की थी. इन्हें पुलिस की कस्टडी से छीनकर ले जाया गया था.

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केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस वीडियो को शेयर होने से रोकने के निर्देश दिए हैं. इस घटना को लेकर अज्ञात हथियारबंद बदमाशों के खिलाफ नोंगपोक सेकमाई पीएस (थौबल जिला) में FIR दर्ज की गई. ये केस अपहरण, गैंगरेप और हत्या की धाराओं में दर्ज है. अभी तक कोई गिरफ़्तारी नहीं हो पायी है. वायरल वीडियो में दिख रही महिलाओं में से एक की उम्र 20 साल, जबकि दूसरी की उम्र 40 साल है. वहीं FIR के मुताबिक 50 साल की एक तीसरी महिला भी इसी दरिंदगी का शिकार हुई थी, जो वीडियो में नजर नहीं आ रही है.

इस घटना का विरोध करने पर एक महिला के पिता और दूसरे के भाई की भी हत्या कर दी गई थी. इस घटना की शिकायत में पीड़िताओं ने बताया है कि 4 मई 2023 को उनके गाँव पर लगभग 800 से 1000 हमलावरों की भीड़ ने हमला किया था. भीड़ के पास इंसास और AK सीरीज की रायफलें जैसे घातक हथियार थे. इनसे बचने के लिए 3 महिलाओं के साथ ही गाँव के 5 लोग जंगल की तरफ भाग गए. मौके पर पहुँची पुलिस ने इन सभी को बचा लिया और साथ लेकर थाने आने लगी तभी रास्ते में भीड़ ने पुलिस बल को रोक कर पीड़ितों को कस्टडी से छीन लिया और उसके बाद इस घटना को अंजाम दिया.

आरोप है कि हिंसक भीड़ ने पहले 20 साल की पीड़िता के पिता की हत्या कर दी. इसके बाद तीनों महिलाओ को कपड़े उतारने पर मजबूर किया गया. जब एक पीड़िता के भाई ने इसका विरोध किया तो भीड़ ने उसकी हत्या कर दी. बाद में इन सभी महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. गैंगरेप के बाद तीनों महिलाएँ जैसे-तैसे वहाँ से निकल पाईं. फिलहाल तीनों पीड़िताएँ एक राहत कैम्प में हैं.

इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी सीधा दखल देते हुए सवाल पूछे हैं कि अपराधियों पर कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

CJI चंद्रचूड का सीधा इस घटना में दखल

सांप्रदायिक संघर्ष के दौरान महिलाओं का एक औजार की तरह इस्तेमाल कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. यह संविधान का सबसे घृणित अपमान है. जो वीडियो हमारे सामने आया है, उससे हम बहुत परेशान हैं. हम सरकार को थोड़ा वक्त देते हैं, वो कदम उठाए. अगर वहां कुछ नहीं हुआ तो हम कदम उठाएंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीधेतौर पर एक्शन लेने की बात की. इस मामले में अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी. इस मामले में मणिपुर CM एन बीरेन सिंह ने कहा है कि हम सभी आरोपियों की मौत की सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. पुलिस ने किडनैपिंग, गैंगरेप और हत्या का मामला दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है.

क्या लिखा है FIR में?

4 मई की दोपहर करीब 3 बजे करीब 800-1000 लोग कांगपोकपी जिले में स्थित हमारे गांव बी फीनोम में घुस आए. उन्होंने घरों में तोड़फोड़ की, घरों का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक, बर्तन, कपड़े और नकदी लूटने के बाद घरों में आग लगा दी. हमलावर मैतेई युवा संगठन, मैतेई लीपुन, कांगलेइपाक कनबा लुप, अरामबाई तेंगगोल, विश्व मैतेई परिषद और अनुसूचित जनजाति मांग समिति से थे.

हमलावरों के डर से कई लोग जंगल की ओर भाग गए, उन्हें नोंगपोक सेकमाई पुलिस ने बचाया। हमलावरों के पास कई हथियार भी थे. उन्होंने सभी लोगों को पुलिस की हिरासत ले छुड़ा लिया. उन्हें 56 साल के सोइटिंकम वैफेई की हत्या कर दी. इसके बाद तीन महिलाओं को कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया और हमलावरों ने महिलाओं के साथ गैंगरेप किया. एक महिला के भाई ने अपनी बहन को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने उसकी हत्या कर दी.
वीडियो में भीड़ महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करती दिख रही है. महिलाएं रो रही हैं और भीड़ से गुहार लगा रही हैं.

क्या है प्रदर्शन का मसला?

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है. यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी. मैतई ज्यादातर हिंदू हैं. नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं और ST वर्ग में आते हैं. इनकी आबादी करीब 50% है. राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इम्फाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है. नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है. ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं.

मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए. समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई. समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था, उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था. इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए. मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी को युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था. उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए.

इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे. इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है. ये सब खुलेआम हो रहा है. इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया, लेकिन ये विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया है कि आज महिलाओं की इज्जत-आबरू से खेलने पर यहां के लोग उतारू हो गए हैं जिसको लेकर राज्य सरकार, केन्द्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट सब एक्शन मोड़ में आ गए हैं.

 

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