बिखर गयी विपक्षी एकता, एनडीए के साथ आये कई दल

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लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर एक तरफ विपक्षी एकता में फूट पड़ती हुई साफतौर पर दिखाई दे रही है. तो दूसरी तरफ बीजेपी लगातार अपना कुनबा बढ़ा रही है. एक के बाद एक वो पार्टी जो बीजेपी से दूर हो गई थी उसे अब बीजेपी अपने में मिला रही है. जैसे जैसे बीजेपी का कुनबा बढ़ रहा है वैसे वैसे विपक्षी पार्टियों पर दबाव भी बढ़ रहा है क्योंकि अगर इसी तरह से बीजेपी में विपक्षी दल शामिल होते रहेंगे तो विपक्षी एकता का राग अलापने वाले लोगों पर गाज गिर जाएगी और वो चुनाव से पहले ही हार जाएंगे. विपक्षी एकता में सेंध लगाते हुए बीजेपी ने एनडीए को और मजबूत कर दिया है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया. जिसके बाद अखिलेश यादव से लेकर बाकी पार्टियों का मुंह खुला का खुला रह गया है. 18 जुलाई को पहले से ही तय विपक्षी दलों की बैंगलोर में बैठक के बाद अब सत्ताधारी बीजेपी ने भी दिल्ली के अशोक होटल में एनडीए घटक दलों की बैठक बुलाई जा रही. बैठक में उन सभी दलों को न्यौता दिया गया है, जो फिलहाल बीजेपी के साथ खड़े हैं, लेकिन मिली जानकारी के मुताबिक कुछ ऐसे दलों को भी इस बैठक में बुलाया जा रहा है जो पहले कभी एनडीए का हिस्सा रहे हैं. 18 जुलाई को एनडीए बैठक में शामिल होने वाले दलों की सूची में 20 पार्टियां शामिल हैं. बैठक में महाराष्ट्र से शिवसेना (शिंदे गुट), एनसीपी (अजीत पवार ग्रुप), बिहार की लोक जनशक्ति पार्टी(एलजीपी) के दोनों धड़े, जीतन राम मांझी की हम पार्टी, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलजेडी, यूपी से अपना दल (सोनेलाल), संजय निषाद की निषाद पार्टी, ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा, मेघालय की कोरनाड संगमा की ऐनपीपी(NDP), नागालैंड से एनडीपीपी(NDPP), सिक्किम से एसकेएम(SKM), हरियाणा से जेजेपी, तमिल नाडू से तमिल मनीला कांग्रेस, ऐईऐदीएमके(AIADMK), IMKMK, झारखंड से आजसू, जोरमथंगमा की मिजो नेशनल फ्रंट, असम की एजीपी, आंध्र से जनसेना जैसे दल एनडीए के घोषित सहयोगी पार्टियां शामिल होंगी. इसके आलावा एनडीए बैठक में जिन 5 राजनीतिक पार्टियों के शामिल होने पर सबकी निगाहें लगीं हैं, उनमें जयंत चौधरी की आरएलडी, पंजाब से शिरोमणि अकाली दल, आंध्र प्रदेश से चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस में से कोई एक और ओडिशा से बीजेडी जैसे दलों को शामिल होने की चर्चा है. ओम प्रकाश राजभर सपा के साथ गठबंधन में थे उन्होंने अखिलेश का दामन छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया है. ओम प्रकाश राजभर ने एनडीए का दामन थामने के साथ ही विपक्षी एकता को तगड़ा झटका भी दे दिया है.

चुनाव के मौसम वैज्ञानिक माने जाने वाले ओम प्रकाश राजभर ने थामा मोदी का हाथ  

 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया है. वो एनडीए परिवार में उनका स्वागत करते हैं. राजभर के इस कदम ने उन्हें नए मौसम वैज्ञानिक की संज्ञा से विभूषित कर दिया है. सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 मिलकर लड़ने का फैसला लिया है. उन्होंने साफ किया कि 14 जुलाई को दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई. उनके साथ कई बिंदुओं पर बात हुई. उन्होंने दावा किया कि दोनों दलों के मिलने से पूरे प्रदेश में एक बड़ी ताकत पैदा होगी. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो सोच है, उसे आगे बढ़ाने में बहुत मदद मिलेगी. ओम प्रकाश राजभर के प्रेस कांफ्रेंस के साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री ने राजभर और उनके बेटे के साथ मुलाकात की फोटो को शेयर कर उनका स्वागत एनडीए में किया. देश के शीर्ष दलित नेताओं में से एक लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व प्रमुख रामविलास पासवान को मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था. अब ओम प्रकाश राजभर के बदले तेवर को देखते हुए उन्हें भी मौसम वैज्ञानिक कहा जा रहा है.

कौन हैं ओम प्रकाश राजभर?
यूपी चुनाव 2022 से पहले उन्होंने अखिलेश यादव के साथ गठबंधन किया. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के वापस न आने देने का दावा कर दिया. ओम प्रकाश राजभर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांशीराम के साथ की थी. 1981 में कांशीराम से जुड़े और बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे. भदोही जिले का नाम संत कबीर नगर रखे जाने पर मायावती के साथ इनका विवाद हो गया. 2001 में यह विवाद इतना गहराया कि ओपी राजभर ने अपनी दिशा अगल करने का फैसला ले लिया. उन्होंने भारतीय समाज पार्टी का गठन किया. बाद में उन्होंने अपनी पार्टी को पिछड़ा वर्ग से जोड़ने के लिए महाराजा सुहेलदेव के नाम का उपयोग किया. पार्टी का नाम सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी रख दिया. ओम प्रकाश राजभर ने साल 2017 में भाजपा के साथ गठबंधन किया. हालांकि, योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री बनने के बाद उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ गई. उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया.

18 जुलाई को बीजेपी ने एनडीए सहयोगियों की बैठक भी बुलाई जा रही है ताकि 2024 लोकसभा चुनाव के लिए एनडीए सहयोगी दलों की राय ली जा सके. छोटे छोटे दल को ज्यादा तरजीह देकर अपने-अपने गठबंधन से जोड़ने के पीछे एक अहम वजह ये भी है कि विगत कुछ चुनावों में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक छोटे दलों का कुल वोट औसतन 10 फीसदी के आस पास रहा है. साल 2019 के चुनाव में बीजेपी की सहयोगी अपना दल को 1.2 फीसदी वोट मिले थे, लेकिन पार्टी दो सीट जीतने में कामयाब रही और बीजेपी को कुर्मी वोट बैंक को साधने में मदद भी की. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने 18 जुलाई को होने वाली एनडीए बैठक पर कहा कि उन्हें खुशी है कि वो (NDA) भी हमारे लाइन में आ रही है. उन्हें एहसास हो गया है कि उन्हें गठबंधन की जरूरत है. वहीं मिली जानकारी के मुताबिक, 18 जुलाई को होने वाली बैठक से पहले 17 जुलाई को एनडीए घटक दलों के अध्यक्षों या प्रमुख नेता एक साथ डिनर पर भी मिलेंगे.ये खबर भी सामने आ रही है. यानि 18 जुलाई को और कौन-कौन सी पार्टियां एनडीए बैठक में शामिल होंगी, इसका अंदाजा 17 जुलाई की एनडीए घटक दलों के डिनर मीटिंग से लग जायेगा. बीजेपी की कोशिश है कि एनडीए के कुनबे को विपक्षी गठबंधन से बड़ा आकार दिया जाय. साथ ही पार्टी ये मैसेज भी देना चाहती है कि वोट बैंक के लिहाज से एनडीए का कुनबा ज्यादा मजबूत है.

 

 

 

 

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