कश्मीर को सुलगाने के लिए साजिश रच रहा पाकिस्तान

Indian Army

अंशिका चौहान- लगातार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान आतंकवाद फैलाने से बाज नहीं आ रहा.गरीब पाक सरकार के पास देश चलाने के पैसे तो नहीं हैं, लेकिन आतंकवादियों को पालने का भरपूर इंतेज़ाम है पाक के पास.आतंकवाद को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही. पाकिस्तान की खस्ता हालत के बीच यहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (Inter-Services Intelligence) की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है.जिससे पता चला है कि पाकिस्तान अब आम नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश में है.पाकिस्तान में बैठे आतंकियों ने कश्मीर में अपने ओवरग्राउंड वर्कर्स को कुछ आदेश दिए हैं. बता दें कि ISI ने ये कहा गया है कि मुठभेड़ में कम से कम 10 आम नागरिकों की मौत होनी चाहिए.कहा गया है कश्मीर में सुरक्षा बलों और आतंकियों की मुठभेड़ में आम नागरिकों की जान जानी चाहिए और इस काम को अंजाम तक पहुंचने के लिए पुरे प्लानिंग के साथ खुद को तैयार कर रहा है ISI जिसके तहत ISI का मकसद कश्मीर को एक बार फिर सुलगाना है और ये काम साल 2018 में भी किया गया था जिसका मुंह तोड़ जवाब पाक आज तक नहीं भूल पाया होगा.Indian Army

धूल चाटने कि आदत बन चुकी है पाक कि-

जब धूल चाटने कि आदत बन चुकी है पाक कि तो भारतीय सेना धूल चटवाने में कभी पीछे नहीं हटती. आम नागरिकों को नुकसान नहीं होने की वजह से पाकिस्तान के आतंकी संगठन और आईएसआई बेचैन हो गए हैं. इसलिए अब ये कुछ ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा आम नागरिकों की मौत हो. इनका मकसद ओजीडब्ल्यू द्वारा एक बार फिर कश्मीर का माहौल खराब करना है. ताकि आम लोगों को निशाना बनाकर एक बार फिर कश्मीर में दहशत फैलाई जा सके.

ओजीडब्ल्यू किसे कहते हैं?

बता दें ओजीडब्ल्यू उन्हें कहते हैं जो जम्मू कश्मीर में आतंकियों को मानवीय सहायता, नकद, आवास और दूसरी सुविधाएं प्रदान करते हैं.उस शख्स को भी ओजीडब्ल्यू कह सकते हैं, जो आतंकियों को सुरक्षित मार्ग, घर या किसी तरह की सूचना प्रदान करता है.अब सोचने वाली बात ये है कि पाक के पास एक भी फूटी कौड़ी नहीं है अपने देश को पालने के लिए वो आतंकवादियों को आर्थिक मदद कैसे दे रहा है.
आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज आने के मूड में नहीं है.  वो  अब भी कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए कोशिशें कर रहा है. भारत के खिलाफ पाकिस्तान कितनी भी साजिश क्यों न रच ले हर बार मुंह के बल ही गिरा ही है.

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