पाकिस्तान सरकार का आतंकवाद के आगे एक और समर्पण

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अंशिका चौहान:  पाकिस्तान के वजीरे आजम कहीं अशरफ गनी की तरह अपनी अवाम को आतंकवादियों के हवाले करने की ताड़ में तो नहीं हैं? क्योंकि जिस हिसाब से इमरान खान आतंकवादी संगठनो से हमदर्दी दिखा रहे हैं ,वो वैश्विक चिंता का कारण बन रहा है, कि कहीं इमरान खान अपने मुल्क को तहरीक-ए-तालिबान और तहरीक-ए-लब्बैक के हवाले तो नहीं छोड़ रहे हैं.एक आतंकी संगठन की सभी मांगों को स्वीकार करना और उनके खिलाफ कोई कारवाही न करना.ये किसी को भी गहरी सोच में डालने के लिए काफी है.

इमरान खान सरकार ने टीएलपी पर लगे प्रतिबंध को भी हटा लिया है. इस्लामाबाद ने टीएलपी के कई हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को भी रिहा कर दिया. जिन्हें उनके हिंसक अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था.वज़ीरे आज़म ने ये तक कह दिया की, वो उन्हें माफ़ करके सारी बातें भूल जाना चाहते हैं और उन्हें रिहा करके आम नागरिक की तरह आम जीवन जीने की इजाज़त देते हैं.इससे एक बात बिल्कुल साफ़ है, की इमरान भिक के लिए अपनी अवाम को बेच भी सकते हैं और ये कहना कहीं से भी गलत नहीं होगा की पाकिस्तान जल्द ही अफ़ग़ानिस्तान की तरह किसी आतंकवादी के हाथ में होगा.

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बता दें की आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार पाकिस्तान में पिछले एक दशक में टीटीपी द्वारा की गई हिंसा में 70,000 लोग हताहत हुए हैं.इमरान के इस फैसले से एक बात तो साफ़ है,की इमरान की कुर्सी अवाम को परेशान ज़रूर कर रही है.कहने का मतलब ये है, पाकिस्तान के लोगों ने नए वजीर ए आजम की तलाश शुरू कर दी है.

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