सी.पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति, BJP ने INDIA सांसदों का जताया धन्यवाद

 

भारत में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने 452 वोट प्राप्त कर भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में विजयी प्राप्त किया। वे 12 सितंबर को पद की शपथ लेंगे। यह चुनाव राजनीतिक उथल-पुथल के बीच संपन्न हुआ, जिसमें महत्वपूर्ण क्रॉस वोटिंग भी सामने आई। चुनाव परिणामों पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने-अपने बयान जारी किए हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव में सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्षी उम्मीदवार सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को हराया। कुल मतदाता संख्या में राधाकृष्णन को 452 वोट प्राप्त हुए, जबकि सुदर्शन रेड्डी को 244 वोट मिले। इस जीत से भाजपा और उसके सहयोगी NDA को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ। चुनाव के दौरान कुछ इंडिया ब्लॉक के सांसदों द्वारा क्रॉस वोटिंग की खबरें सामने आईं, जिससे सियासी बयानबाजी तेज हो गई।

कांग्रेस ने इस चुनाव पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे नैतिक और राजनीतिक हार बताया। पार्टी का कहना है कि भाजपा ने आंकड़ों के बल पर चुनाव जीता है, लेकिन लोकतांत्रिक प्रक्रिया में गंभीर दरारें नजर आई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “यह न सिर्फ विपक्षी ताकतों की हार है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए भी चिंता का विषय है।” वहीं BJP ने स्पष्ट किया कि इस जीत में इंडिया ब्लॉक के कुछ सांसदों ने समर्थन दिया, जिस पर उन्होंने धन्यवाद भी जताया।

राज्यपाल से उपराष्ट्रपति बनने जा रहे सी.पी. राधाकृष्णन एक अनुभवी प्रशासनिक और राजनयिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति हैं। उनका नाम हमेशा से संयम, दूरदर्शिता और संवैधानिक प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता रहा है। राजनीतिक जानकार इस चुनाव को भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला करार दे रहे हैं।

उपराष्ट्रपति के पद पर शपथ ग्रहण के बाद राधाकृष्णन की जिम्मेदारियों में राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन प्रमुख रूप से शामिल रहेगा। साथ ही वे राष्ट्रपतिजीव कार्यकाल में देश के संवैधानिक संतुलन का एक अहम हिस्सा बनेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि राधाकृष्णन का चुनाव वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सियासी समझौते और रणनीतिक सोच का परिणाम है।

अब सबकी निगाहें 12 सितंबर पर टिकी हैं, जब सी.पी. राधाकृष्णन औपचारिक रूप से भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। इस पद की जिम्मेदारी संभालते हुए उनका कार्यभार भारत के संवैधानिक ढांचे को मज़बूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। आगामी समय में उनकी भूमिका पर राजनीतिक और सार्वजनिक ध्यान बना रहेगा।

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