चार एंटी-कन्वर्जन कानूनों को मंजूरी, वक्फ संपत्तियों पर कार्रवाई, मोदी-शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात

 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चार एंटी-कन्वर्जन कानूनों को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद धार्मिक रूपांतरण पर सख्ती बढ़ने की संभावना है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की, जिसे वक्फ संशोधन विधेयक और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है। वक्फ बोर्ड की 4.5 लाख संपत्तियों पर अतिक्रमण और विवादों के बीच सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है। साथ ही, जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

राष्ट्रपति ने चार एंटी-कन्वर्जन कानूनों को मंजूरी दी, जो जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्म परिवर्तन रोकने के लिए बनाए गए हैं। ये कानून कई राज्यों में पहले से लागू थे, और अब केंद्र स्तर पर इन्हें मजबूती मिली है। सरकार का दावा है कि यह कदम सामाजिक समरसता के लिए जरूरी है, जबकि विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया है।

वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर भी विवाद गहराया है। संसद ने हाल ही में इस विधेयक को पारित किया, जिसे राष्ट्रपति ने 4 अप्रैल को मंजूरी दी। विधेयक में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और संपत्तियों के लिए केंद्रीकृत पंजीकरण जैसे बदलाव शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से 58,889 पर अतिक्रमण और 13,200 विवादों में फंसी हैं। सरकार का कहना है कि यह कानून पारदर्शिता बढ़ाएगा, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे अल्पसंख्यक अधिकारों के खिलाफ बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात में वक्फ विधेयक और जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई। जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की सरकार पर संकट की अटकलें तेज हैं, हालांकि कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। अमित शाह ने कहा, “वक्फ विधेयक से गरीब मुस्लिमों को फायदा होगा, और विरोधी भ्रामक प्रचार कर रहे हैं।”

विपक्ष ने वक्फ विधेयक को संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “यह विधेयक अल्पसंख्यकों को कमजोर करने की साजिश है।” इंडिया गठबंधन ने 7 अगस्त को बैठक बुलाई है।

ये घटनाक्रम भारतीय राजनीति में नया तनाव पैदा कर सकते हैं। वक्फ संपत्तियों पर कार्रवाई और अब्दुल्ला की कुर्सी पर संकट जैसे मुद्दों पर नजरें टिकी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *