सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को लगाई फटकार, चीनी कब्जे के दावे पर उठाए सवाल, SIR पर संसद में तीखी बहस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को उनके उस दावे के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन ने भारत की 2,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। कोर्ट ने उनके बयान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा, “सच्चा हिंदुस्तानी ऐसा नहीं कहेगा।” साथ ही, कोर्ट ने लखनऊ की निचली अदालत में चल रही मानहानि कार्यवाही पर तीन सप्ताह के लिए रोक लगा दी। उधर, संसद में राष्ट्रीय सूचना रजिस्टर (SIR) को लेकर तीखी बहस छिड़ी, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने राहुल गांधी से पूछा, “आपको कैसे पता कि चीन ने 2,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन पर कब्जा किया? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय सबूत है?” यह टिप्पणी राहुल गांधी के 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिए गए बयान के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि गलवान घाटी संघर्ष के बाद चीन ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किया और भारतीय सैनिकों पर हमला किया। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों को संसद में उठाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर।

राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि विपक्ष के नेता के रूप में सवाल उठाना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा, “अगर विपक्ष सवाल नहीं पूछेगा, तो लोकतंत्र में उनकी भूमिका क्या होगी?” हालांकि, कोर्ट ने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि बिना सबूत के ऐसे दावे राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इस बीच, संसद में SIR को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की निर्वाचन आयोग की घोषणा पर तीव्र बहस हुई। विपक्ष ने इसे गोपनीयता के उल्लंघन का मुद्दा बताते हुए कड़ा विरोध जताया, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। SIR को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।

भाजपा ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “राहुल गांधी के गैर-जिम्मेदाराना बयान देश की संप्रभुता पर सवाल उठाते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को राहत दी है, लेकिन उनकी टिप्पणियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस को तेज कर दिया है। SIR पर संसद में चर्चा और इसके राष्ट्रीय कार्यान्वयन का मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है।

 

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