संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। शाह ने साफ कहा कि “हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता” और यह आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। इस बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया, जिस पर शाह ने कहा कि “सच का सामना करने की ताक़त विपक्ष में नहीं है।”

अमित शाह का यह बयान उस वक्त आया जब राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर केंद्र सरकार की नीति और कार्रवाई पर चर्चा हो रही थी। गृह मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार का लक्ष्य कश्मीर को आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त करना है।

शाह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब आतंक के खिलाफ नरमी नहीं दिखाएगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया भर के 190 देशों का समर्थन मिला है, जो भारत की आतंकवाद विरोधी नीति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संकेत है।

विपक्ष द्वारा ऑपरेशन को लेकर सवाल उठाने पर शाह ने कांग्रेस को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस का ट्रैक रिकॉर्ड आतंकवाद को लेकर दुविधाजनक रहा है। जब सेना अपने प्राणों की आहुति देती है, तब कांग्रेस सवाल उठाती है।”

राज्यसभा में बहस के दौरान विपक्षी दलों द्वारा वॉकआउट किए जाने पर शाह ने कहा, “ये वही लोग हैं जो राष्ट्रहित के मुद्दों पर चर्चा से भागते हैं। उन्हें सच की नहीं, सिर्फ सत्ता की चिंता है।”

इस सत्र में अमित शाह का यह संबोधन सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने व्यापक रूप से यह संदेश भी दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।

सत्र के अंत में शाह ने यह स्पष्ट किया कि भारत की सुरक्षा नीति अब “जीरो टॉलरेंस टू टेरर” की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस लड़ाई में कोई राजनीतिक दबाव या भ्रम आड़े नहीं आएगा।