क्या पाकिस्तान ईरान की जासूसी कर रहा है अमेरिका के साथ मिलकर? ट्रंप-मुनीर बैठक से पहले बड़ा दावा

 

ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे गंभीर सैन्य संघर्ष के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से ईरान का समर्थन करने के बावजूद, अमेरिका के साथ मिलकर उसकी जासूसी की है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की बैटलफील्ड एयरबोर्न कम्युनिकेशन नोड (BACN) प्रणाली का इस्तेमाल ईरान पर निगरानी के लिए किया गया और इसमें पाकिस्तान की भूमिका रही।

यह दावा एक कथित स्क्रीनशॉट के साथ सामने आया है, जिसमें BACN 11-9001 को 17 जून को शाम 4:30 बजे यूटीसी पर Flightradar24 पर देखा गया बताया गया है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि इस निगरानी उड़ान के लिए निर्देशांक पाकिस्तान एयरफोर्स ने मुहैया कराए थे। हालांकि अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

BACN क्या है और इसमें पाकिस्तान की भूमिका पर क्यों सवाल?

BACN को एक “फ्लाइंग गेटवे” माना जाता है जो ज़मीन और आसमान में मौजूद गठबंधन सेनाओं के बीच संचार को संभव बनाता है। जिस विमान की निगरानी उड़ान को लेकर विवाद है, वह अमेरिकी वायुसेना का Bombardier E-11A (टेल नंबर 11-9001) है। Air & Space Forces Magazine के मुताबिक, E-11A संचार नेटवर्क को विस्तारित करता है और युद्ध क्षेत्र में बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है।

Flightradar24 पर इसकी मौजूदगी की खबर के बाद यह संदेह बढ़ा है कि पाकिस्तान, जो इज़राइल के खिलाफ ईरान का समर्थन करता दिख रहा है, पर्दे के पीछे अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को सहयोग दे रहा है।

कूटनीतिक हलचल और मोदी का इशारा

ईरान में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अपने राजनयिकों, स्टाफ और कुछ गैर-आवश्यक कर्मचारियों के परिवारों को ईरान से हटाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है। साथ ही, तेहरान के हजारों निवासी इज़राइल के हमलों की आशंका से शहर छोड़कर भाग रहे हैं और जरूरी सामान जमा कर रहे हैं।

वहीं, G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आतंकवाद नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर कुछ देशों पर तो तत्काल प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जबकि कुछ ऐसे देश जो आतंकवाद को खुलेआम समर्थन देते हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है। उनके इस बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में देखा जा रहा है, खासतौर पर तब जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने जा रहे हैं।

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