असम चुनाव पर विदेशी साजिश का साया, सीएम हिमंता सरमा का बड़ा खुलासा

 

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने देश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था दोनों को झकझोर दिया है। उनका आरोप है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियां असम में आगामी विधानसभा चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रही हैं, और इसके लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया गया है। उन्होंने दावा किया है कि हजारों फर्जी फेसबुक अकाउंट पाकिस्तान और बांग्लादेश से ऑपरेट हो रहे हैं, जो असम में चुनावी नैरेटिव को गुमराह करने और एक खास उम्मीदवार को जिताने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह सिर्फ चुनावी हस्तक्षेप नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता और लोकतंत्र पर एक डिजिटल हमला है।

मुख्यमंत्री  हिमंता सरमा ने बताया कि असम चुनाव को लेकर फेसबुक पर सक्रिय 2000 अकाउंट्स में से आधे से अधिक पाकिस्तान और बांग्लादेश से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस तरह की गतिविधियां और तेज़ होंगी। सीएम हिमंता सरमा के मुताबिक ISI एक खास उम्मीदवार को जिताने के लिए सुनियोजित अभियान चला रहा है। राज्य की विशेष शाखा इन अकाउंट्स की जांच कर रही है और सितंबर तक इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म बना चुनावी जंग का नया मोर्चा

CM का कहना है कि अब लड़ाई सिर्फ भाषणों या सड़कों पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। यह बदलाव गंभीर है क्योंकि सोशल मीडिया लोगों की राय और निर्णयों को प्रभावित करता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से संचालित फर्जी अकाउंट्स न केवल चुनाव को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, अफवाह फैलाने और धार्मिक ध्रुवीकरण जैसे प्रयासों में भी शामिल रहते हैं।

बांग्लादेशी नेटवर्क और राजनीतिक कनेक्शन पर आरोप

हिमंता सरमा ने दावा किया कि कोलकाता स्थित एक कॉल सेंटर से एक ही दिन में 2000 फेसबुक अकाउंट्स को सक्रिय किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी के पाकिस्तान की सेना से संबंध रहे हैं और वे कई बार भारत-पाकिस्तान के बीच यात्रा कर चुकी हैं। हिमंता सरमा ने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया और कहा कि कुछ नेता अपने राजनीतिक लाभ के लिए देश की अखंडता को दांव पर लगा रहे हैं। उनका यह बयान बताता है कि विदेशी ताकतों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भारत की चुनावी प्रक्रिया में दखल एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

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