केजरीवाल के खिलाफ बीजेपी का प्रदर्शन, इस्तीफे की मांग

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केजरीवाल बार बार मीडिया के आगे आकर झूठ फैला रहे हैं कि उन्हे और उनके नेताओं को फंसाया जा रहा है. कोई घोटाला नहीं हुआ है कोई सबूत नहीं मिले हैं. बीजेपी केजरीवाल की इसी चेहरे को बेनकाब कर रही है कि अगर घोटाला नहीं हुआ. तो क्यों कोर्ट से आप के भ्रष्ट नेताओं को जमानत नहीं मिल रही है.

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अब केजरीवाल बस इस्तीफा देकर दिल्ली से भागने वाले है. क्योंकि अब उनका भी सलाखों के पीछे जाने का वक्त आ गया है. तो वहीं अब केजरीवाल के साथ साथ उनके चहेते राघव चड्ढा भी फंस गए हैं. जल्द ही जनाब बेघर होने वाले हैं. झूठ के शीशमहल खड़ी करने में माहिर आम आदमी पार्टी की कलई एक बार फिर खुल गई है.

राघव चड्ढा ने तो कोर्ट में जान का खतरा तक बता दिया. और उनकी तरफ से दलील दी गई कि मुझे पहले टाइप 5 आवंटित किया गया था, फिर उपराष्ट्रपति ने इस मुद्दे पर अपना दिमाग लगाया और टाइप 7 आवंटित किया. भले ही मैं इस निर्णय का हकदार नहीं हूं कि यह निष्कासन अधिकारी द्वारा पीपी अधिनियम के तहत निर्णय नहीं है. मुझे Z+ सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है और पुलिस अधिकारियों की एक टुकड़ी मेरे घर में बैठती है. ऐसा नहीं है कि सुरक्षा केवल तभी लागू होती है जब मैं पंजाब में होता हूं. इसका मतलब यह नहीं कि जब मैं दिल्ली में रहूं तो मेरी हत्या कर दी जाये! जब मैं दिल्ली में होता हूं तो मेरी भी सुरक्षा की जानी चाहिए.

संजय सिंह भी जेल जाते ही अपनी हत्या का डर दिखा रहे हैं. और अब बंगला खाली करने के मामले में राघव चड्ढा ने भी जान का खतरा बता रहे हैं. हर काम मस्ती से खुलेआम कर रहे हैं लेकिन जब किसी भी केस में एक्शन होता है तो उनकी जान खतरे में आ जाती है. अब राघव चड्ढा की ये नौटंकी काम आने वाली नही है.

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कोर्ट ने कहा था की राघव चड्ढा ये दावा नहीं कर सकते कि उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान आवास पर कब्जा जारी रखने का पूरा अधिकार है. सरकारी आवास का आवंटन केवल वादी को दिया गया विशेषाधिकार है. और आवंटन रद्द होने के बाद भी उसे उस पर कब्जा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है. बावजूद उसके भी राघव चड्ढा की बैचेनी बंगले के लिए कम नहीं हो रही है.

दरअसल राघव चड्ढा ने दिल्ली सर्विस अमेंडमेंट बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने के प्रस्ताव पर सांसदों के फर्जी दस्तखत कराए. बीजेपी की शिकायत के बाद ये मामला संसद की विशेषाधिकार समिति के पास जांच के लिए भेज दिया गया. राज्यसभा में 7 अगस्त को रात 10 बजे दिल्ली सर्विसेज अमेंडमेंट बिल पास किया गया था. इससे पहले चड्ढा ने बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया था.

सीएम के सरकारी आवास पर 45 करोड़ रुपये खर्च का मामला सामने आने के बाद से दिल्ली में मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी ने कहा कि आप की असलियत अब सामने आ गई है. सीएम केजरीवाल का सादगी का दावा तो दिखावा भर है. दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने सीएम आवास विवाद पर कहा है कि बिना टेंडर के आवास पर 45 करोड़ का खर्च करना बड़ा भ्रष्टाचार है. सचदेवा का आरोप है कि केजरीवाल ने घर के अंदर ही करोड़ों का घोटाला कर लिया.

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