5 दिन का संसद का विशेष सत्र शुरू

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5 दिन का संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है. ये सत्र 18 सितंबर से 22 सितंबर तक होगा. सोमवार (18 सितंबर) को इस सत्र की शुरुआत हुई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुराने संसद भवन की ‘हर ईंट’ को श्रद्धांजलि दी. लोकसभा में अपने एक घंटे से अधिक लंबे भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के लोकतंत्र की यात्रा को याद किया और कहा कि इस विरासत भवन में आखिरी दिन उन 7,500 से अधिक सांसदों को समर्पित होना चाहिए जिन्होंने आजादी के बाद से इस भवन में सेवा की है.

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पीएम मोदी ने पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री, पीवी नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी समेत उनके बाद के नेताओं की दूरदर्शिता की सराहना की, लेकिन लोकसभा को मनमोहन सिंह सरकार के दौरान ‘वोट के बदले नकद’ घोटाले की याद भी दिलाई.

संसद विशेष सत्र: क्या उम्मीद करें?

नए लोकसभा में 75 वर्षों की संसदीय यात्रा, उपलब्धियां, यादों पर चर्चा होगी. लोकसभा द्वारा एक बुलेटिन जारी किया गया और कहा गया कि सदस्यों को सूचित किया जाता है कि सोमवार, 18 सितंबर, 2023 को अन्य औपचारिक कार्य जैसे कागजात रखना आदि के अलावा ‘संविधान सभा से शुरू होने वाली 75 वर्षों की संसदीय यात्रा- उपलब्धियां, अनुभव, यादें और विषयों पर एक चर्चा आयोजित की जाएगी.

विशेष सत्र में 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर पुराने संसद भवन से नए भवन में औपचारिक तबदीली होगी. 19 सितंबर को पुरानी संसद में फोटो सेशन होगा, फिर सुबह 11 बजे सेंट्रल हॉल में समारोह होगा. उसके बाद हम नई संसद में प्रवेश करेंगे. नई संसद में संसद सत्र शुरू होगा प्रह्लाद जोशी ने कहा कि 19 सितंबर और 20 सितंबर से नियमित सरकारी कामकाज शुरू हो जाएगा.

इसके अलावा विशेष सत्र के दौरान चार महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किये जाने का कार्यक्रम है. ये विधेयक हैं: अधिवक्ता संशोधन विधेयक, प्रेस और आवधिक पंजीकरण विधेयक, 2023, डाकघर विधेयक, 2023, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023.

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इंडिया ब्लॉक की कुल 24 पार्टियां संसद के विशेष सत्र में भाग लेने के लिए सहमत हो गई हैं. कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति समेत कई मुद्दों पर चर्चा और बहस की मांग की थी.

संसद के कितने सत्र होते हैं?

आमतौर पर एक साल में संसद में तीन सत्र होते बुलाये जाते हैं. बजट सत्र हर साल फरवरी के महीने से मई के महीने तक चलता है. संसद में इस समय बजट पर वोटिंग हो इस लिए पेश किया जाता है.

दूसरा सत्र होता है मानसून का. संसद में ये सत्र जुलाई से अगस्त के बीच में होता है.

और आखरी संसद का सत्र होता है शीतकालीन सत्र जो नवम्बर से दिसम्बर के बीच बुलाया जाता है.

क्या होता है संसद का विशेष सत्र?

हमारे संविधान में संसद का विशेष सत्र जैसे किसी शब्द का ज़िक्र नहीं है. पर, अनुछेद 85(1) के प्रावधानों के अनुसार सरकारों द्वारा विशेष सत्र बुलाया जाता है.

अगर ज़रुरत पड़े राष्ट्रपति चाहे तो संसद का विशेष सत्र बुला सकते हैं. इस सत्र को बुलाने के लिए संसदियों मामलो की कैबिनेट समिति बुला सकती है और सांसदों को राष्ट्रपति के नाम पर यह सत्र बुलाया जाता है.

अभी तक कितने विशेष सत्र बुलाये गए मोदी सरकार द्वारा?

2014 से अभी तक में मोदी सरकार में केवल एक बार विशेष सत्र बुलाया है. GST को लागू करने के लिए यह सत्र 30 जून 2017 को बुलाया गया था. ये विशेष सत्र संसद के सेंट्रल हॉल में आयोजित हुआ था.

 

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