पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य की मतदाता सूची में लगभग एक करोड़ रोहिंग्या प्रवासी, बांग्लादेशी मुस्लिम मतदाता, मृत मतदाता, डुप्लिकेट ID और फर्जी मतदाता शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के साथ बैठक की, जिससे ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
BJP नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा, “पश्चिम बंगाल में लगभग एक करोड़ रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुस्लिम, मृत मतदाता, डुप्लिकेट और फर्जी मतदाता हैं। चुनाव आयोग को इन नामों को हटाकर मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करनी चाहिए।” उन्होंने बिहार की तर्ज पर SIR लागू करने की मांग की, जहां हाल ही में 65 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए गए।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने दक्षिण और उत्तर 24 परगना में मतदाता सूची में अनियमितताएं पाईं, जहां 127 फर्जी मतदाताओं की पहचान हुई। CEO मनोज अग्रवाल ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पिछले एक साल की फॉर्म-6 जांचने और 14 अगस्त तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
TMC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए SIR को “साइलेंट इनविजिबल रिगिंग” करार दिया। TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, “SIR के बहाने नागरिकों के वोटिंग अधिकार छीने जा रहे हैं। एक कुत्ते के नाम पर भी रेजिडेंशियल सर्टिफिकेट जारी किया गया।” उन्होंने चुनाव आयोग पर BJP के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।
BJP नेता अमित मालवीय ने X पर लिखा कि सीमावर्ती जिलों में फॉर्म-6 आवेदनों में अचानक वृद्धि चिंताजनक है। उन्होंने ममता सरकार पर वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाया। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने SIR का विरोध करते हुए कहा कि वह बंगाल में ऐसी प्रक्रिया नहीं होने देंगी।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद तूल पकड़ रहा है। चुनाव आयोग ने पारदर्शिता का भरोसा दिलाया है, लेकिन BJP और TMC के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है।
चुनाव आयोग की जांच और SIR प्रक्रिया से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। मतदाता सूची की शुद्धता पर फैसला 2026 चुनावों को प्रभावित करेगा।