पटना में वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ रैली, बिहार चुनाव में महागठबंधन का CM चेहरा बना सियासी मुद्दा

 

वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ मुस्लिम संगठनों और नेताओं के विरोध ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। इमारत-ए-शरिया बिहार, उड़ीसा और झारखंड के अमीर-ए-शरीयत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी की अध्यक्षता में 29 जून को पटना के गांधी मैदान में ‘वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ’ रैली का आयोजन किया गया। दूसरी ओर, आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर स्थिति साफ होती दिख रही है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने तेजस्वी यादव के नाम पर समर्थन जताया है, लेकिन सीट बंटवारे को लेकर गठबंधन में असमंजस बना हुआ है।

वक्फ कानून को लेकर विरोध तेज

वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ मुस्लिम समाज में नाराजगी देखी जा रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने किशनगंज में एक सभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “मोदी सरकार इस कानून के जरिए देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा करना चाहती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुसलमानों की धार्मिक संपत्तियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, जो संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ है।

गांधी मैदान में जुटे मुस्लिम संगठन

पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस रैली में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जुटे। मौलाना रहमानी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश हो रही है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट रहें।

बिहार चुनाव: तेजस्वी को लेकर तस्वीर साफ लेकिन पेंच बाकी

राजनीतिक मोर्चे पर, कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि महागठबंधन को बहुमत मिला, तो मुख्यमंत्री आरजेडी से ही होगा। उन्होंने तेजस्वी यादव का नाम लेते हुए समर्थन भी जताया। हालांकि, गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर अब भी सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस और आरजेडी के बीच कई सीटों पर दावेदारी जारी है, जिससे महागठबंधन में तनाव बना हुआ है।

वक्फ कानून को लेकर उभरा असंतोष और बिहार चुनाव में सीएम चेहरे को लेकर चल रही रस्साकशी, दोनों ही मुद्दे आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। जहां एक तरफ मुस्लिम संगठनों का प्रदर्शन सरकार के लिए चुनौती बन सकता है, वहीं महागठबंधन की आंतरिक खींचतान चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *