ईरान-इजरायल युद्ध में अमेरिका की खुली एंट्री ने पश्चिम एशिया को जंग के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज और इस्फहान—पर जबरदस्त हमला किया है। इस हमले में B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया और अमेरिका ने गुआम में भी अपने विमान तैनात कर दिए हैं। जवाब में ईरान ने इजरायल के 14 ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। इस पूरी घटना से भारत समेत कई देशों की राजनीति में हलचल मच गई है, वहीं विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के तीन घंटे बाद देश को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है और अगर शांति नहीं हुई तो और भी बड़े हमले होंगे। इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ट्रंप को इस हमले के लिए धन्यवाद कहा, जबकि ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। ब्रिटेन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक खतरा बताया, वहीं पाकिस्तान और सऊदी अरब ने चिंता जताई।
भारत में विपक्ष का विरोध और सवाल
अमेरिकी हमले के बाद भारत में राजनीतिक भूचाल आ गया है। फारूक अब्दुल्ला ने मुस्लिम देशों की चुप्पी पर नाराजगी जताई, जबकि संजय राउत ने मोदी सरकार पर तंज कसा कि जब ट्रंप इजरायल के साथ खड़े हो सकते हैं तो भारत क्यों नहीं? महबूबा मुफ्ती ने ट्रंप-मुनीर बैठक का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब पाकिस्तान को अपनी चूक का अंदाज़ा हो रहा होगा।
आतंकी हमले में एनआईए की बड़ी सफलता
इस बीच, पहलगाम आतंकी हमले में एनआईए को बड़ी सफलता मिली है। दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने पाकिस्तानी आतंकियों को शरण दी थी। पकड़े गए परवेज अहमद और बशीर अहमद ने बताया कि ये आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे और हमले में सीधे तौर पर शामिल थे।
फेक न्यूज के खिलाफ कर्नाटक सरकार के नए प्रस्ताव ने भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कानून के तहत 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित है, जिसे लेकर विपक्ष ने इसे लोकतंत्र विरोधी कदम बताया है।