ईरान-इजरायल जंग में अमेरिका की एंट्री, ट्रंप ने पाकिस्तान को बना दिया मोहरा

 

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध में अब अमेरिका की एंट्री ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इस जंग में जहां एक ओर अमेरिका ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है, वहीं दूसरी ओर चीन और रूस ने भी अपना-अपना स्टैंड साफ कर दिया है। इस भू-राजनीतिक बदलाव का सबसे बड़ा असर पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है, जो अब अमेरिका और चीन के बीच दबाव में पिसता नजर आ रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मुलाकात सुर्खियों में रही। ट्रंप ने मुनीर को व्हाइट हाउस में लंच पर आमंत्रित किया था। यह लंच कोई सामान्य घटना नहीं थी—भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी थीं। भारत में खासकर यह सवाल उठने लगे थे कि जब ट्रंप का भारत से संबंध मजबूत माना जाता है, तो फिर वह एक दुश्मन देश के सेना प्रमुख को इतनी अहमियत क्यों दे रहे हैं?

इस लंच और बैठक के बाद उस सवाल का जवाब भी सामने आ गया। व्हाइट हाउस ने आधिकारिक रूप से बताया कि असीम मुनीर को लंच पर बुलाने के पीछे वजह क्या थी। दरअसल, अमेरिका ने पाकिस्तान को ईरान के खिलाफ खड़ा कर दिया है। ट्रंप की रणनीति साफ है—वे पाकिस्तान को अपने खेमे में लाकर ईरान के खिलाफ मजबूत सैन्य और रणनीतिक समर्थन हासिल करना चाहते हैं।

पाकिस्तान में बढ़ी असीम मुनीर के खिलाफ बगावत, ट्रंप ने रच दिया बड़ा खेल

ट्रंप ने असीम मुनीर को दुनिया का सबसे महंगा लंच खिलाकर एक बड़ा राजनीतिक खेल खेला है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस लंच की आड़ में असीम मुनीर ने पूरा पाकिस्तान अमेरिका के हाथों सौंप दिया है। यही वजह है कि पाकिस्तान में असीम मुनीर के खिलाफ आक्रोश तेजी से फैल रहा है। सेना के भीतर ही नहीं, बल्कि शाहबाज शरीफ की सरकार में भी इस फैसले को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।

ईरान-इजरायल जंग का सबसे बड़ा नुकसान अब पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति में पाकिस्तान को जिस मोहरे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे न केवल उसकी संप्रभुता पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि आंतरिक विद्रोह की आशंका भी बढ़ गई है। ट्रंप की इस चाल ने पाकिस्तान को एक ऐसे संकट में धकेल दिया है, जहां से निकल पाना मुश्किल साबित हो सकता है।

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