कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के लिए बड़ा झटका देते हुए, दिल्ली की एक अदालत ने उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया है। इसके साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा से जुड़ी 8 कंपनियों और 43 संपत्तियों, जिनकी अनुमानित कीमत 2100 करोड़ रुपये है, को जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति अर्जन के आरोपों के तहत की गई, जिसने कांग्रेस नेतृत्व को हिलाकर रख दिया है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब 10 जनपथ, जो लंबे समय से सोनिया गांधी का आधिकारिक निवास रहा, इस जांच के दायरे में आया। सूत्रों के अनुसार, ईडी ने वाड्रा की कंपनियों के लेनदेन की जांच के दौरान कई अनियमितताएं पाईं, जिनमें कथित तौर पर विदेशी फंडिंग और हवाला लेनदेन शामिल हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया कि जब्त की गई संपत्तियों में दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य प्रमुख शहरों में लक्जरी प्रॉपर्टी शामिल हैं।
अदालत ने वाड्रा को 15 अगस्त तक पेश होने का आदेश दिया है, अन्यथा उनकी गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। राहुल गांधी ने एक बयान में कहा, “यह केंद्र सरकार की ओर से विपक्ष को दबाने की साजिश है। हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।” हालांकि, ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जांच में ठोस सबूत मिले हैं, और यह कार्रवाई कानून के दायरे में है।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की है, जबकि सत्तारूढ़ दल ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कदम बताया है। राजनीतिक विश्लेषक अनीता शर्मा के अनुसार, “यह मामला कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले।”
जब्त की गई 2100 करोड़ की संपत्ति और वाड्रा के खिलाफ अरेस्ट वारंट ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि सोनिया गांधी के 10 जनपथ से जुड़े प्रतीकात्मक महत्व को भी चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और जांच के नतीजे राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दे सकते हैं।