पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी अस्थिर और उकसावे वाली सोच को उजागर कर दिया है। इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में, जब दुनियाभर के देश शांति की अपील कर रहे हैं, तब पाकिस्तान ने उल्टा परमाणु हमले की धमकी देकर हालात को और भड़काने का काम किया है।
दरअसल, एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा है कि अगर इज़राइल ने ईरान पर परमाणु हमला किया, तो पाकिस्तान भी इज़राइल पर परमाणु हमला करेगा। अब सवाल यह उठता है – क्या पाकिस्तान खुद को परमाणु ठेकेदार समझ बैठा है? क्या वह यह भूल गया कि ऐसा गैर-जिम्मेदार बयान पूरे मध्य-पूर्व को जंग की आग में झोंक सकता है?
ईरान-इज़राइल युद्ध में पाकिस्तान की एंट्री पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पाकिस्तान खुद एक अस्थिर राष्ट्र है—जहां आतंकवाद पनपता है, अर्थव्यवस्था चरमराई हुई है और लोकतंत्र भी संकट में है। ऐसे में इस तरह की धमकियां देना उसके “नापाक इरादों” को उजागर करता है। अब वक्त आ गया है कि दुनिया ऐसे गैर-जिम्मेदार देशों पर लगाम लगाए, जो जंग के हालात का फायदा उठाकर अपनी खोई हुई पहचान वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान को पानी की बूंद-बूंद के लिए तरसाने की तैयारी
दूसरी ओर भारत पाकिस्तान को जल मोर्चे पर घेरने की पूरी तैयारी कर चुका है। सिंधु नदी के पानी का पूरा इस्तेमाल करने के लिए भारत एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। यह योजना नदियों को आपस में जोड़ने की है, जिससे सिंधु जल समझौते के तहत भारत के हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित हो सके।
एक रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर से पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक पानी ले जाने के लिए 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाने की योजना पर काम चल रहा है। यह नहर चिनाब नदी को रावी-ब्यास-सतलुज नदी प्रणाली से जोड़ेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस योजना की जानकारी देते हुए कहा, “सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से श्री गंगानगर तक पहुँचाया जाएगा। पाकिस्तान पानी की हर बूँद के लिए तरस जाएगा।