ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख के बयान से सियासी घमासान, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

 

ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के खुलासे के बाद सियासी बवाल तेज हो गया है। एपी सिंह ने बताया कि इस अभियान के दौरान भारत ने पाकिस्तान के छह विमान मार गिराए, जिनमें पांच लड़ाकू और एक इंटेलिजेंस विमान शामिल था। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई भारत के अत्याधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से की गई, जिसने 300 किलोमीटर दूर से लक्ष्य को ध्वस्त कर अपनी क्षमता साबित की। वायुसेना प्रमुख ने इसे “बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति” का परिणाम बताया।

हालांकि, इस सैन्य सफलता के बीच कांग्रेस ने सरकार से सवाल किए। पार्टी नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोका गया। कांग्रेस के इन बयानों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर सेना का अपमान करने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ताओं ने कहा कि ऐसे समय में, जब सेना ने देश की रक्षा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, विपक्ष का इस तरह संदेह जताना जवानों के मनोबल को ठेस पहुंचाने जैसा है। बीजेपी ने कांग्रेस से देश से माफी मांगने की मांग की।

चर्चा के दौरान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) और सीजफायर का मुद्दा भी सामने आया। सत्तारूढ़ दल ने आरोप लगाया कि विपक्ष पीओके और सीमा पर स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ गलत संदेश देने की कोशिश कर रहा है, जबकि विपक्ष का कहना है कि सरकार को पारदर्शी जवाब देना चाहिए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कांग्रेस को कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “आतंकवादी यहां आए और लोगों का धर्म पूछकर उन्हें मार डाला। हमने तय किया कि हम किसी का धर्म पूछकर नहीं मारेंगे, हम उनके कर्म देखकर जवाब देंगे, और हमने उन्हें मारा। ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को यह संदेश दिया कि हम किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन अगर कोई हमें छेड़े तो हम उसे छोड़ते भी नहीं हैं।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर न केवल तकनीकी और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की रक्षा क्षमता और रणनीतिक इच्छाशक्ति का भी स्पष्ट प्रदर्शन है। हालांकि, इस मुद्दे पर जारी सियासी बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, खासकर जब संसद का सत्र चल रहा है और विपक्ष-सरकार के बीच टकराव अपने चरम पर है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और सेना आने वाले समय में इस अभियान से जुड़े और तथ्य सार्वजनिक करते हैं या नहीं, और क्या इस राजनीतिक विवाद का कोई ठोस समाधान निकल पाता है।

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