ब्रिटेन में पीएम मोदी की ऐतिहासिक डील, देश में SIR विवाद और उपराष्ट्रपति चुनाव पर सियासी हलचल तेज

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिटेन में भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर इतिहास रच दिया है। इस समझौते को अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता माना जा रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी। वहीं, देश के भीतर SIR विवाद पर सियासी टकराव तेज हो गया है और उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों में रणनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और किंग चार्ल्स से मुलाकात कर इस ऐतिहासिक FTA पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया अमेरिकी टैरिफ नीति के प्रभाव से जूझ रही है। पीएम मोदी ने आतंकवाद और लोकतंत्र के दुश्मनों पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के खिलाफ किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा।

उधर, बिहार में SIR यानी वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। संसद से लेकर पटना तक विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर आयोग ने कदम नहीं पीछे खींचे तो बिहार विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जा सकता है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर चुनाव आयोग को निशाने पर लिया और कर्नाटक में सीट चोरी का आरोप लगाया।

उपराष्ट्रपति पद पर भी राजनीतिक हलचल तेज है। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद इस पद पर नए चेहरे को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। NDA सूत्रों के अनुसार, अगला उपराष्ट्रपति भाजपा और RSS की पृष्ठभूमि से होगा, जिसमें वरिष्ठता, अनुभव और संगठन के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दिल्ली के हरियाणा भवन में 70 से अधिक मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात की। यह बैठक सामाजिक सौहार्द और संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। बैठक में RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी और मुस्लिम समुदाय के प्रमुख धर्मगुरु मौजूद थे।

आखिर में, उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली-मुंबई सहित देशभर में 35 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। करीब 50 कंपनियां जांच के घेरे में हैं और 3,000 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में पूछताछ जारी है।

इन सभी घटनाओं ने देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, और आने वाले दिनों में इनके प्रभाव और भी गहराते दिखाई दे सकते हैं।

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