प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 जुलाई से पांच देशों की राजनयिक यात्रा पर रवाना हुए हैं, जिनमें घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। यह यात्रा 9 जुलाई तक चलेगी और इसे प्रधानमंत्री मोदी की पिछले एक दशक की सबसे लंबी विदेश यात्रा के रूप में देखा जा रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को मजबूत करना और कूटनीतिक सहयोग को नई दिशा देना है।
ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई धार दी है। सम्मेलन के दौरान वैश्विक दक्षिण के मुद्दों, डिजिटल अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसे विषयों पर भारत ने सशक्त तरीके से अपनी बात रखी।
वहीं, हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के घेरे में है। क्वाड (QUAD) देशों की बैठक में आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया, जिसमें भले ही पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया, लेकिन संदेश स्पष्ट था। आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को चेतावनी दी गई, जिसे भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी चीन को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत अब किसी भी प्रकार की सीमा पार गतिविधियों या रणनीतिक दबाव को सहन नहीं करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भारत की विदेश नीति अब अधिक स्पष्ट, सशक्त और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की भूमिका को वैश्विक समुदाय ने सराहा है। सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ताओं में व्यापार, तकनीकी सहयोग और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री मोदी की बहुपक्षीय यात्रा भारत की विदेश नीति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है। आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दे पर वैश्विक मंचों से मिले समर्थन से यह स्पष्ट है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान और चीन के लिए यह बदलता भारत और भी बड़ी चुनौती बन सकता है।