पटना में राहुल-तेजस्वी की गाड़ी से कन्हैया-पप्पू की बेदखली, सियासी गठबंधन में दरार या रणनीति?

पटना में 9 जुलाई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की मौजूदगी में विपक्षी दलों के साझा प्रदर्शन के दौरान एक अजीब वाकया देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कन्हैया कुमार और हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव क सुरक्षाकर्मियों ने उस गाड़ी से उतरने के लिए कह दिया जिस पर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव सवार थे। इस घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

इस दौरान कन्हैया कुमार और पप्पू यादव ने गाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देकर दोनों को हटा दिया गया। जबकि गाड़ी पर कुछ ऐसे लोग भी दिखे जो आम तौर पर पहचान में नहीं आते। इस घटना ने सवाल खड़े कर दिए कि क्या सिर्फ जगह की कमी वजह थी या इसके पीछे कोई सियासी गणित काम कर रहा था।

कन्हैया कुमार और तेजस्वी यादव के रिश्ते लंबे समय से सहज नहीं रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट पर दोनों आमने-सामने थे। कन्हैया उस वक्त भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) से चुनाव लड़ रहे थे जबकि राजद ने अपना उम्मीदवार उतारा था। नतीजा यह रहा कि दोनों हार गए और भाजपा के गिरिराज सिंह विजयी रहे। इसके बाद भी तेजस्वी और कन्हैया के बीच दूरी बनी रही।

वहीं पप्पू यादव और राजद सुप्रीमो लालू यादव के रिश्ते भी समय-समय पर बदलते रहे हैं। कभी अच्छे दोस्त रहे पप्पू यादव अब राजद से दूरी बनाए हुए हैं और निर्दलीय सांसद हैं। उन्होंने कांग्रेस के साथ फिर से नजदीकियां बढ़ाई हैं लेकिन तेजस्वी यादव के साथ उनके संबंध अब भी सहज नहीं हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी बिहार में तेजस्वी यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। ऐसे में कन्हैया कुमार और पप्पू यादव को साझा रथ से दूर रखना एक रणनीतिक फैसला हो सकता है ताकि विपक्षी गठबंधन में कोई दरार न पड़े।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सिर्फ सुरक्षा या जगह की बात होती तो इन नेताओं को अलग से समझाया जा सकता था। सार्वजनिक तौर पर ऐसा होने से दोनों नेताओं की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि कांग्रेस और राजद दोनों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम का आने वाले बिहार विधानसभा चुनावों और विपक्षी एकता पर क्या असर पड़ता है। फिलहाल, पटना का यह दृश्य बिहार की सियासत में हलचल पैदा कर चुका है।

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