सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 2022 में भारत-चीन सीमा विवाद पर दिए बयान के लिए कड़ी फटकार लगाई, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि चीन ने भारत की 2,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया। कोर्ट ने पूछा, “आपके पास इस दावे का क्या सबूत है?” और कहा, “सच्चा भारतीय ऐसा नहीं कहेगा।” इस टिप्पणी ने विपक्षी इंडिया गठबंधन को बैकफुट पर ला दिया, जिसने राहुल के समर्थन में बैठक की। साथ ही, नेशनल हेराल्ड मामले में 7 अगस्त को सुनवाई और रॉबर्ट वाड्रा को राउज एवेन्यू कोर्ट का नोटिस राहुल के लिए नई चुनौतियां लाया है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने राहुल गांधी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया। कोर्ट ने कहा, “विपक्ष के नेता के रूप में आपको संसद में सवाल उठाने चाहिए, सोशल मीडिया पर नहीं।” राहुल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि विपक्ष का काम राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल उठाना है, लेकिन कोर्ट ने सबूतों की कमी पर सवाल उठाए। कोर्ट ने लखनऊ की मानहानि कार्यवाही पर तीन सप्ताह की रोक लगाई।

विपक्षी गठबंधन ने 5 अगस्त को बैठक में कोर्ट की टिप्पणी को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि कौन सच्चा भारतीय है।” गठबंधन ने सरकार की सीमा सुरक्षा नीति पर सवाल उठाए।

राहुल गांधी के लिए चुनौतियां यहीं खत्म नहीं होतीं। नेशनल हेराल्ड मामले में 7 अगस्त को दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई होनी है, जिसमें राहुल और सोनिया गांधी पर अनियमितताओं के आरोप हैं। दूसरी ओर, रॉबर्ट वाड्रा को राजस्थान में जमीन घोटाले के सिलसिले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 28 अगस्त को पेश होने का नोटिस जारी किया है।

बीजेपी ने कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए राहुल पर हमला बोला। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “राहुल के बयान राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं।”

सुप्रीम कोर्ट की फटकार, नेशनल हेराल्ड केस, और वाड्रा की कानूनी मुश्किलों ने राहुल गांधी को घेर लिया है। इंडिया गठबंधन का विरोध और 8 अगस्त को प्रस्तावित चुनाव आयोग मार्च राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है।