पीएम मोदी की विदेश यात्रा पूरी, संसद से सियासत तक पांच बड़े घटनाक्रमों से गरमाया देश

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ब्रिटेन और मालदीव की चार दिवसीय विदेश यात्रा से भारत लौट आए। इस यात्रा में भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) समेत कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। वहीं, देश में SIR (Special Summary Revision) को लेकर सियासी हंगामा, कर्नाटक भवन विवाद, बिहार में अपराध पर बयानबाजी और कारगिल विजय दिवस पर हुई श्रद्धांजलियों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने मालदीव से लौटते ही तूतीकोरिन (तमिलनाडु) का दौरा किया, जहां उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इसके बाद दिल्ली में उनकी शीर्ष भाजपा नेताओं के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। यह बैठक संसद में सोमवार को होने वाली ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बहस की रणनीति के तहत अहम मानी जा रही है, जिसकी शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

दूसरी ओर, SIR को लेकर विपक्ष का विरोध और तेज हो गया है। बिहार में 56 लाख फर्जी मतदाताओं की रिपोर्ट के बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ को रोकना गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद के तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सत्ताधारी NDA के अंदर भी असंतोष उभरने लगा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अपराध बेकाबू हो चुका है और ऐसी सरकार का समर्थन करना दुर्भाग्यपूर्ण है।

कर्नाटक कांग्रेस में गुटबाज़ी खुलकर सामने आ गई है। दिल्ली स्थित कर्नाटक भवन में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी अफसरों के बीच झगड़े ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। एसडीओ सी. मोहन कुमार और एच. आंजनेय के बीच हुई झड़प के बाद मामला शिकायत और जांच तक पहुंच चुका है।

इस बीच देश ने शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस अवसर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की एकता और संप्रभुता को चुनौती देने वालों को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।

इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत में राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दे किस तरह आपस में जुड़ते हुए देश के जनमानस को प्रभावित करते हैं। आने वाले सप्ताह में संसद में होने वाली बहसें इन मुद्दों को और गहराई से उजागर करेंगी।

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